khadgamala stotram

This version of Devi Khadgamala was taken from renowned devotional Youtuber Nanduri Srinivas Garu. I had no intention of circulating this. I just kept online for my personal use and convenience to recite the Devi Khadgamala Stotram.

DEVI KHADGAMALA STOTRAM

ॐ ऐम् ह्रीम् श्रिम् ऐम् क्लीम् सैह्

ॐ नमः त्रिपुरसुंदरी

हृदयदेवी, शिरोदेवी, शिखादेवी, कवचदेवी, नेत्रदेवी, अस्त्रदेवी, कामेश्वरी, भगमालिनी, नित्यक्लिन्ने, भेरुंडे, वह्निवासिनी, महावज्रेश्वरि, शिवदूति, त्वरिते, कुलसुन्दरि, नित्ये, नील पताके, विजये, सर्वमंगले, ज्वालामालिनी, विचित्रे, श्रीविद्ये ।

दक्षिणामूर्तिमयि, नारायणमयि, ब्रह्ममयि, सनकमयि, सनन्दनमयि, सनातनमयि, सनत्कुमारमयि, सनत्सुजातमयि, वशिष्ठमयि, शक्तिमयि, पराशरमयि, कृष्णद्वैपायनमयि, पैलमयि, वैशंपायिनमयि, जैमिनिमयि, सुमंतुमयि, श्रीशुकमयि, गौडपादमयि, गोविंदमयि, श्रीविद्या शंकरमयि, पद्मपादमयि, हस्तामलकमयि, त्रोटकमयि, सुरेश्वरमयि, विद्यारण्यमयि, परमेश्टिगुरु श्री आदि शंकराचार्यमयि

त्रैलोक्यमोहन चक्रस्वामिनि, प्रकटयोगिनि -

अणिमा सिद्धे, लघिमा सिद्धे, महिमा सिद्ध, ईशित्व सिद्धे, वशित्व सिद्धे, प्राकाम्य सिद्धे, भुक्ति सिद्ध इच्छा सिद्धे, प्राप्ति सिद्धे, सर्वकाम सिद्धे –
ब्राह्मी, महेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, महेंद्रि, चामुंडे, महालक्ष्मी –
सर्वसंक्षोभिणि, सर्वविद्राविणि, सर्वाकर्षिणि, सर्ववशंकरि, सर्वोन्मादिनि, सर्वमहांकुशे, सर्वखेचरि, सर्वबीजे, सर्वयोने, सर्वत्रिखंडे - त्रिपुरे

सर्वाशापरिपूरक चक्रस्वामिनि, गुप्तयोगिनि –

कामाकर्षिणि, बुद्ध्याकर्षिणि, अहंकाराकर्षिणि, शब्दाकर्षिणि, स्पर्शाकर्षिणि, रूपाकर्षिणि, रसाकर्षिणि, गंधाकर्षिणि, चित्ताकर्षिणि, दैर्याकर्षिणि, स्मृत्याकर्षिणि, नामाकर्षिणि, बीजाकर्षिणि, आत्माकर्षिणि, अमृताकर्षिणि, शरीराकर्षिणि – त्रिपुरेशि

सर्वसंक्षोभण चक्रस्वामिनि, गुप्ततर योगिनि -

अनंगकुसुमे, अनंगमेखले, अनंगमदने, अनंगमदनातुरे, अनंगरेखे, अनंगवेगिनि, अनंगांकुशे, अनंगमालिनि" - त्रिपुर सुंदरी

सर्वसौभाग्यदायक चक्रस्वामिनि, सम्प्रदाय योगिनि -

सर्वसंक्षोभिणि, सर्वविद्राविणि, सर्वाकर्षिणि, सर्वाह्लादिनि, सर्वसम्मोहिनि, सर्वस्तंभिनि, सर्वजृंभिनि, सर्ववशंकरि, सर्वरंजनि, सर्वोन्मादिनि, सर्वार्थसाधिनि, सर्वसंपत्तिपूरिणि, सर्वमंत्रमयी, सर्वद्वन्द्वक्षयंकरि - त्रिपुर वासिनि

सर्वार्थसाधक चक्रस्वामिनि, कुल योगिनि -

सर्व सिद्धिप्रदे, सर्व संपत्प्रदे, सर्व प्रियंकरि, सर्व मंगल कारिणि, सर्व कामप्रदे, सर्व दुःख विमोचनि, सर्व मृत्युप्रशमनि, सर्वविघ्न निवारिणि, सर्वांग सुंदरि, सर्व सौभाग्य दायिनि - त्रिपुरा श्री

सर्वरक्षाकर चक्रस्वामिनि, निगर्भयोगिनि -

सर्वज्ञे, सर्वशक्ते, सर्वैश्वर्यप्रदायिनि, सर्वज्ञानमयि, सर्वव्याधि विनाशिनि, सर्वाधार स्वरूपे, सर्व पापहरे, सर्वानंदमयि, सर्वरक्षास्वरूपिणि, सर्व ईप्सितार्थप्रदे - त्रिपुर मालिनि

सर्व रोग हर चक्रस्वामिनि, रहस्य योगिनि -

वशिनि, कामेश्वरि, मोदिनि, विमले, अरुणे, जयिनि, सर्वेश्वरि, कौलिनि - त्रिपुरा सिधे

सर्व सिद्धि प्रद चक्रस्वामिनि, अति रहस्य योगिनि -

बाणिनि, चापिनि, पाशिनि, अंकुशिनि, महाकामेश्वरि, महावज्रेश्वरि, महाभगमालिनि - त्रिपुरांबिके

सर्वानंदमयचक्रस्वामिनि, परापर रहस्ययोगिनि -

महा महा कामेश्वरि, महा श्री चक्र नगरसाम्राज्ञि, महा राज राजेश्वरि, प्रताप भारति परब्रह्म स्वरूपिणि, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमः - सौः क्लीं ऐं श्रीं ह्रीं ऐं

Taken from Nanduri Srinivas Devotional Youtube Channel. comments and thanks can be written in his youtube channel

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